श्री चिंतामणि विनायक वैध्य ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक
(History of Hindu medaeval India)
में लिखा है कि हिंदुओं ने बड़े बड़े जलयानों का बनाना यूनानियों से सीखा जब वे कलिंग और आंध्र में फैल गए |
यह सच है की यूनानी समुद्री यात्रा करते थे पोत-निर्माण शिल्प के जानकार थे परंतु यह कदापी ग्रहणयोग्य नहीं लगता कि
युनानीओं ने हीं आर्यों को जलपोत बनाना सिखाया ......
इस बात को साबित करने के लिये कि हमारे पूर्वज आर्य भी प्राचीनकाल में जलयात्रा करते थे,
हमें एक अंग्रेजी शब्द का इतिहास जानना होगा.....
ये शब्द है.... #Car
कार् शब्द मूल संस्कृत शब्द #कारं से अंग्रेजी में प्रचलित हुआ था....
ओर संस्कृत में कारं का अर्थ जलयान है.....
ऋकवेद का यह श्लोक तथा इसके अर्थ शायद आपको यकीन दिला सकता है...
सुत्रामाणं पृथिवीं द्यासनेहसं ।।
परिप्रासिण्यदत् कविः
सिन्दोरुर्मावधिश्रीतः
कारं विभ्रत् पुरुस्पृहम् ।।
ऋ। ८/१४/१
*****हे शिल्पी तुम् समन्दर के लहरों पर
(कारं) जलयान निर्माण करके
आनन्दपूर्वक यात्रा करो *****
"वेदों के यथार्थ स्वरूप"
पुस्तक के page..74 देखें..
वेद व पुराणों में ऐसे अनगिनत ऐतिहासिक तथ्य मिल जाते है जिसे अंग्रेजी ऐतिहासिकों को अनुकरण करनेवाले तथाकथित भारतीय ऐतिहासिक एक प्रमाण भी नहीं मानते है.....
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