गाँव में एक काजी था | बहुत ही कंजुस व्यक्ति था | गाँव वाले उसके कंजुसी से भलीभाँति परिचित थे |
काजी के जूते बहुत ही पुराने हो चुके थे | अब मोची ने भी और सिलाई करने से या कील लगाने से मना कर दिया था। सारे गाँव वाले उन जूतों को पहचानते थे।
एक बार काजी स्नान करने हमाम गए। स्नान करके बाहर आये तो निश्चित स्थान पर उन्हें अपनी जूते नहीं दिखाई दिए। इधर उधर देखने पर एक जगह नये जूते दिखाई दिए। काजी ने सोचा कोई गलती से उनके जूते पहनकर गया होगा, इसलिए वे दूसरे जूते पहनकर चल दिये।
वास्तव में उस दिन गाँव के नये न्यायाधीश स्नान करने आये तो उनके सेवकों ने सामने की जगह साफ किया। उसमें काजी के जूते एक कोने में हो गए। न्यायाधीश स्नान करके आये तो सेवकों को उनके जूते नहीं मिले। सब लोग चले गए थे, लेकिन कोने में एक जूते पड़े थे, जिसको सेवकों ने तुरन्त पहचान लिया कि यह तो काजी के जूते है।
तुरन्त काजी को बुलाया गया और दंड दिया गया। अब काजी ने सोचा इन जूतों को छोड़ ही देना चाहिए।
शुक्रवार को जान बुझकर नमाज के बाद मस्जिद के बाहर जूते को छोड़ दिए। सब लोग के जाने के बाद मौलवी को ध्यान में आया कि किसी के जूते छुट गए हैं। पास जाकर देखा तो तुरन्त जान गया कि ये तो काजी के जूते हैं। उसे तुरन्त काजी के पास भेज दिये।
दूसरे दिन काजी ने जूतों को नदी में छोड़ दिया | वे जूते मछलीमारों को मछली के साथ जाल में फँसे मिले। कीलों के कारण जाल फट गया। मछलीमारों ने जूतों को पहिचान लिया कि यह तो काजी के जूते हैं। गुस्से में उसे लेकर काजी के घर के पास आकर खुली खिड़की से काजी के घर में फेंक दिये। काजी आराम से घर में बैठा था, जूते उसके सर से टकराये और काजी को चोट लग गई।
काजी सोच में डूब गये। अपने घर के पीछे गड्ढे में गाड़ने का प्रयास किया, तो लोगों को लगा कि काजी को खजाना प्राप्त हुआ है, इसलिए सब लोक इकट्ठा हुए। काजी को सबको चाय पिलानी पड़ी।
आखिरी बार उसने रात में गाँव से बाहर जाकर नदी में जूते को फेंक दिया। दूसरे दिन सुबह चैन से बैठा ही था कि पूरे गाँव में हल्ला होने लगा। सभी के घर में नल से पानी नहीं आ रहा था। जाँच करने पर पाया गया कि पम्प हाउस का पाईप चोक कर गया है। सफाई करने पर वही काजी का सर्वपरिचित जूता पाईप में फँसा पाया गया। गाँव वाले दंड लेकर जूते फिर वापस कर दिये।
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