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मंगलवार, 26 जनवरी 2016

जगन्नाथ स्वामी भवतु मे

न वैयाचे राज्यंन च कनकमाणिक्य बिभबम् !न यचेरहं रम्यंसकळजनकाम्यां बरबधूम् ।!

सदाकाळे काळे प्रमथपतिनागीतारचितो... !जगन्नाथ स्वामी नयन पथगामीभवतु मे .... !

!मुझे राज्य नहीँ चाहिए !स्वर्णालंकार मणिमाणिक्य मे मुझे लोभ नहीँ !सर्वजनकाम्य मोहिनी सुंदरी नारीरत्न भी चाहता नहीँप्रमथपति सदाशिव महेशजिनका नाम अहोरात्र जपते हैवही प्रभु मेरे नैनोँ को राह दिखाएमेरे नयन पथगामी बने !!-- --

आदि शंकराचार्य जब श्री जगन्नाथ धाम आये थेउनके मुखसे प्रभुजी के प्रथम दर्शन मे यह ब्रह्मवाक्य निकला व उत्कल कलिगंदेश मे प्रशिद्ध हो गया !

गुरुवार, 2 अप्रैल 2015

ओड़िआओँ शादिवाला अनोखा रस्म Handi dhuduka

आज से पाँचदिन पूर्व हमारे एक रिस्तेदार का विवाह संपन्न हुआ था । हमारे यहाँ विवाह पूर्व और बाद कई रस्मेँ होते है और ओड़िशा की संस्कृति एक तरह से उत्तरभारतीय दक्षिणभारतीय संस्कृति की समन्वय हि है । फिर भी कुछ विशेषताएँ जरुर देखने को मिलता है ।
==> ऐसा ही एक रस्म शादी के 4थे दिन किया जाता है जिसे ओड़िआ मेँ
‪#‎ HANDI_DHUDUKA‬
कहाजाता है ।
यह रस्म बिलकुल आसान है
शादी के ठिक 4थे दिन रात को
वर के घर मेँ वनाये गये वेदी पर इष्टदेव कि पूजार्चना के वाद घर मेँ रखेगये पुराने हाँडी (मिट्टी से बना बर्तन) और राख फेँक कर देवर-भाबी ,जीजा-जीजी तथा अन्य रिस्तेदार जिनसे मजाक मस्ती कियाजाता हो आपस मेँ यह खेल खेलते है ।
इस खेल मेँ अकसर लोग दुसरोँ के घर मेँ राख से बचने के लिये छुपते है ......खेल खत्म होने के बाद घर मेँ बनायेगये खास पकवान खा कर इस रस्म को आखरी अंजाम दिया जाता है ।

शुक्रवार, 1 नवंबर 2013

ओडिशा मेँ दीपावली

ओडिशा मेँ दिवाली :- भारत मेँ अलग अलग क्षेत्रोँ मेँ एक ही त्योहार के अलग अलग रुप होते हैँ . उत्तर तथा पश्चिम भारत मेँ इस पर्व को भगवान राम के अयोध्या आगमन के याद मेँ मनाया जाता है परंतु ओडिशा मेँ इसी दिन आपने पूर्वोजोँ को दिये जला कर विदा किया जाता है .. विश्णु पुराण मेँ वली राजा और वामन अबतार की कथा आती है जिसमेँ भगवान राक्षस राज वली के गर्व को ध्वंस्त कर उसे पाताल लोक मेँ स्तान देते हेँ और साल मेँ केवल एक माह के लिये पृथ्वी मेँ आनेँ का वरदान भी देते है . और यही वो मूल कथा जिसको आधार मानकर ओडिशा मेँ दिवाली को एक अलग ही रंग मेँ बनाया जाता है....जाते हुए आपने पूर्वजोँ को लोग यह मंत्र कहकर विदा करते है "गंगा जाओ गया जाओ अंधकार मेँ आये थे और उजाले मेँ जाओ".,.,.,.,