गुरुवार, 2 अप्रैल 2015

भारत मेँ 1857 को प्रथम स्वतंत्रता संग्राम हुआ था या सिपाही विद्रोह ?

29 मार्च 1857 को भारतीयोँ ने पहलीवार अंग्रेजोँ के खिलाफ विद्रोह किया और 1 मई तक चला था ।
मंगल पांडे ने बैरकपुर के परेड ग्राउंड में गोली चलाने से इनकार कर इसकी शुरवात की थी ।
29 मार्च को बैरकपुर में ईस्ट इंडिया कंपनी के अंग्रेज अफसर पर पहली गोली मंगल पांडे ने चलाई और बाकी सिपाहियों को भी ब्रिटिश अधिकारियों पर हमला बोलने को कहा । अंग्रेजी सेना ने मंगल पांडे को गिरफ्तार कर लिया और बाद में मुकदमा चलाकर फांसी दे दी । उस समय सेना में लाए गए नए एनफील्ड राइफल और कारतूस को लेकर सिपाही मंगल पांडे ने विरोध जताया था ।
माना जा रहा था कि उन कारतूसों को बनाने में गाय और सूअर की चर्म या वसा का इस्तेमाल किया गया था । ये दोनों ही चीजें हिंदू और मुसलमानों दोनों के लिए अपवित्र मानी जाती हैं । इस विरोध ने पूरे उत्तर भारत में विद्रोह की एक लहर चला दी थी । भारत में इसे आजादी की पहली लड़ाई कहा गया लेकिन ब्रिटिश शासन ने उसे सिपाही विद्रोह का नाम दिया ।
कोलकाता के बाहरी क्षेत्र के बैरकपुर में अंग्रेजी शासन ने 1765 में अपनी पहली छावनी बनाई थी । उसी बैरकपुर परेड ग्राउंड में 8 अप्रैल 1857 को मंगल पांडे को फांसी पर लटका दिया गया । उनके विद्रोह ने मेरठ से दिल्ली तक विरोध की लहर चला दी थी । आजादी का पहला संग्राम विफल रहा लेकिन इस विद्रोह का असर बहुत व्यापक रहा । सामूहिक नेतृत्व के अभाव के कारण विद्रोह को कुचला भी जा सका । इतिहासकार मानते हैं कि 1857 के विद्रोह ने ही आजादी की लड़ाई की मजबूत नींव रखी थी और अगर यह विद्रोह कुछ वर्ष पूर्व हुआ होता तो शायद अंग्रेज भारत मेँ टिक नहीँ पाते । 1857 तक संचार एबं परिवहन क्षेत्र मेँ काफी उन्नति हुई थी यही कारण है कि अंग्रेज विद्रोह कुचलने मेँ सफल हुए । साधारण जनतानेँ भी इस विद्रोह मेँ सिपाहीऔँ का साथ नहीँ दिया था उस समय भारतीय समाज या तो शोया हुआ था अथवा उसे यकिन न था की उन्हे अंग्रेजोँ से युँ मुक्ति मिलजायेगी । भले अंग्रेजोँ ने इसे सिपाही विद्रोह कहा पर
भारतीय बुद्धिजीवि आज भी इसे प्रथम स्वतंत्रता संग्राम मानते है । हालाँकि एक लम्बे समयकाल तक भारतीय स्कुलोँ के पाठ्यपुस्तकोँ मेँ इसे सिपाही विद्रोह के रुप मेँ ही पढ़ाया गया । एक तरह से कंग्रेस द्वारा इस सशस्त्र आदोँलन को गांधी की अंहिसा आंदोलन से कम महत्व देने के लिये हर संभव प्रयाश किया गया था ।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें