- खड़ग सिंह के खड़कने से खड़कती हैं खिड़कियाँ, खिड़कियों के खड़कने से खड़कता है खड़ग सिंह -
इसे कहते पढ़ते या सुनते समय कभी आपके मन मे ये खयाल आया है ....
कि
भला ये खड़कसिँह नाम का कौनो बंदा था भी कि नहीँ ..
दरसल ये मुहावरा
पंजाब हरियाणा जैसे इलाकोँ मे ज्यादे प्रयोग किए जाते है
इस मुहावरे का प्रयोग उन लोगोँ के लिए किया जाता है जो उखाड़ तो कुछ नहीँ सकते हाँ बड़े घराने मे जन्म हो जाने भर के कारण खुदको शेर समझने लगते है ।
अब प्रश्न उठता हैये खड़ग सिँह कौन था.... !
*खड़गसिँह महाराज रणजीत सिँह के पुत्र व उत्तराधिकारी था
वह न केवल मंद बुद्धि था बल्कि उद्धत सिखोँ को वशंमेँ रखनेकि क्षमतासे भी रहित था
गद्दीपर बैठने के साल भर बाद ही 1840 ई॰ मेँ उसकी हत्या कर दी गयी
ये थे महान पिता के अयोग्य पुत्र....खड़गसिँह
वैसे खड़ग सिँह के नाम से एक प्रसिद्ध ड़ाकु के बारे मे कई जनसृति भी इन्ही इलाकोँ मे
प्रचलित है
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