शुक्रवार, 26 फ़रवरी 2016

अग्निकुल


"अग्नीकुल"राजपुतोँ की चार जातियोँ,
1.पवार-परमार
2.परिहार-प्रतिहार
3.चौहान-चाहमान
4.सोलंकी-चालुक्य

कि गणना अग्नीकुल क्षत्रियोँ मे होती है

चंदबरदाई के रासोके अनुसार अग्निकुलके इन चार राजपुतोँ के पूर्व पुरुष दक्षिणी राजपुतानेके आबु पहाड़मेँयज्ञके अग्निकुंड से प्रकट हुए थे ।इसमे इनके दक्षिण राजस्थानसे सम्बन्धित होनेका पता चलता है ।
कुछ लोग मानते है कि इसी यज्ञ से इन्हे शक्तिओँ के साथ यह कर्त्तव्य प्रदान किआ गया था कि वे उस सीमान्त क्षेत्र का वंशानुक्रमिक रक्षक बने रहेगेँ ।

[भारतीय इतिहास कोष (पृष्ठ -5)संशोधित अंश]

मूल पुस्तक मे लिखा गया है
कुछ लोगोँ का मत है कि यह यज्ञ विदेशी जातियोँ को वर्णाश्रम व्यवस्था मेँ लेनेके लिए किया गया था और इस प्रकारइन जातियोँ को उच्च क्षत्रियवर्ण मेँ स्थान दिया गया था । 

भारतीय इतिहास कोष के रचयिता हैश्रीमान् सच्चिदानन्द
भट्टाचार्य जी

इतिहासकार ने यह संदर्भ-

जर्नल अफ दि रायल एन्थ्रोपिलिजिकलइंस्टीट्युट ,पृ॰42
से लिए है

च्युँकि ये अंग्रेजी किताब किसी युरोपियन ने लिखा है
तथा उस लेखक ने राजपुतोँ को विदेशी बतलाया है

इसके पिछे इनका उद्देश्य भारतीयोँ को आपसमे लढ़वाने व भारतीयोँ को विदेशी साबित करना रहा होगा ।

शनिवार, 13 फ़रवरी 2016

कोझिकोड

कोझिकोड़ [Kozhikode)केरल का एक प्रशिद्ध ऐतिहासिक सहर !!!

समय के साथ युँ तो इस सहरके कई नाम प्रचलन मे आये हैपरंतु स्थानीय मलयालम भाषी अधिवासी प्राचीनकाल सेइसे कोझिकोड़ ही कहते चले आ रहे !
अंग्रेजीराज के समय यह सहर भारतमे कालिकट् के नामसे विख्यात हुआ !अरबी इसे आज भी‪#‎क्वालिक्यु‬,तामिल‪#‎कल्लिक्कोट्टाऐ‬, कन्नडा मे‪#‎कल्लिकोअटे‬और चाइनीज लोग‪#‎कालिफो‬कहते है ।.

.... विदेशी Kozhikode को‪#‎Calicut‬क्युँ कहा करते थे???

वजह है यहाँ के पुरातन सांस्कृतिक कपड़ा उद्योग ...

.यहाँ के लोग कार्पास् से एक खास तरह का कपड़ा बनाते थे जिसे 16 वीँ सदी तक cāliyansकहाजाता था
यह cāliyans कपड़ा उनदिनोँ युरोप मे खुब बेचा खरिदा जाता था और उसे युरोपियन तथा मध्यप्राच्य के लोग calico कहा करते थे... 

.[अंग्रेजी मे कालिको शब्द का सर्वप्रथम प्रयोगएमी मुसलिन् ने 1505 मे किया था !!]

1498 AD मे भास्को डा गामा जलजाहज़ द्वाराकोझिकोड़ से 18 K.m उत्तर मे Kappad नामक जगह पर उतरे थे।

हाँलाकि ऐतिहासिकोँ के माने तो पुरातन काल से ही कोझिकोड़मध्यप्राच्य ,युरोप और चीनीगणराज्य मे प्रशिद्ध थाप्राच्य मसाला व कप्पड़ा व्यापार के लिये ।

पुर्त्तगालीओँ से काफी पहले चीनी व आरवीओँ के साथ स्थानीयव्यापारी द्रव्य लेनदेन का व्पापार करते थे ।

पुर्त्तगालीओँ ने 1511 मे यहाँ एक फैक्ट्री लगायाजो 1525 कार्यक्षम रहाफिर 1615 मे यहाँ अंग्रेज आये और 1665 तक व्पापार किया1698 फ्रेँच और 1752 मे डच लोगोँ ने यहाँ अपना अपना डेरा बनाया

1765 मे मैसुर राज्य ने इस क्षेत्र को अपने अधिकार मे ले लिया और इसतरह से मैसुर राज्य पतन के बाद इस सहर का सत्व अंग्रेजोँ के हातोँ मे चलागया था !

ऐसा नहीँ है कि अंग्रेजोँ ने ही कोझिकोड़ को कालिकट् नाम दिया होहाँ अंग्रेजोँ ने इस सहर का आधिकारीक नाम कोझिकोड़ से कालिकटरखा जरुर है...

.कई विदेशी परिव्राजकोँ ने इस सहर के बारेमे अपने भ्रमण ग्रथं मे लिखा हैमुस्लिम् परिव्राजक Ibn Batuta (A.D. 1342–47)ने अपने भ्रमण ग्रंथ मेइस सहर को कालिकट् ही लिखा है

Ma Huan(1403 AD),एक चीनी व्यापारी अपने भ्रमणग्रथं मे इसका बर्णना करता पायागया है

प्रशिद्ध भुगोलशास्त्री Abdur Razzak(1442–43)ने भी यहाँ का दौरा किया था

इटालियन खोजकर्ता Niccolò de' Conti 1445 मे यहाँ पाँव रखनेवाले प्रथम ख्रिस्तियन भ्रमणकारी है ।

उन्होने अपने किताब मे इसे प्राच्य मसालोँ का मूलकेन्द्र बताया ।

वहीँ Russian भ्रमणकारी Afanasy Nikitin(1468–74) ने कोझिकोड़ को 'Calecut' कहा है और वो अपने किताब मे लिखते है
कि

ये भारत महासागर का "big bazaar." है ।

इन सब ऐतिहासिक सबुतोँ के आधार पर यह जरुर कहा जा सकता है कि प्राचीनकाल से ही कोझिकोड़ विदेशोँ मे Calicut के नाम से प्रसिद्ध रहा है ।

शुक्रवार, 12 फ़रवरी 2016

मिजबान


एक दम्पति के घर एकबार एक अतिथी आये
उनके लिये 9 पकवान 6 तरकारी बनौ
और उनकी प्रिय पापड़ भी

🍌 🍮🍬 🍩 🍨🍹🍻🍷🍹🍵🍰🍩🍳🍔🍯🍮🍖🍗🍤🍢🍆🍎🍏🍅🍊

अतिथी को सब परोसा गया लेकिन भावीजी पापड़ देना भुलगयी
अब अतिथी लाज सरम के मारे वोल नहीं पा रहे थे

फिर उनके दिमाग मे एक ठो
जोरदार idea
आयो
कहने लगे--- -- -- ----

पता है कल मैं तो मरते मरते बचा हुं जी
घर का मालिक हैरन...........

क्युं ...

अतिथी :- अरे एक लम्बा कारा नाग से
रस्ते में भेंट हो गयो थो

🐍🐍🐍
पता है कितना लम्बा था..............

उ जो पापड़ हैै वहां
😀😀😀😀😀😀
हा वहा तक लम्ब है.........

तब जाइके भावीजी के याद आत के पापड़ द्यौ नहीं और अपना भूल सुधार लेतो हैं😊😊😊😊😊😊😊

मंगलवार, 26 जनवरी 2016

जगन्नाथ स्वामी भवतु मे

न वैयाचे राज्यंन च कनकमाणिक्य बिभबम् !न यचेरहं रम्यंसकळजनकाम्यां बरबधूम् ।!

सदाकाळे काळे प्रमथपतिनागीतारचितो... !जगन्नाथ स्वामी नयन पथगामीभवतु मे .... !

!मुझे राज्य नहीँ चाहिए !स्वर्णालंकार मणिमाणिक्य मे मुझे लोभ नहीँ !सर्वजनकाम्य मोहिनी सुंदरी नारीरत्न भी चाहता नहीँप्रमथपति सदाशिव महेशजिनका नाम अहोरात्र जपते हैवही प्रभु मेरे नैनोँ को राह दिखाएमेरे नयन पथगामी बने !!-- --

आदि शंकराचार्य जब श्री जगन्नाथ धाम आये थेउनके मुखसे प्रभुजी के प्रथम दर्शन मे यह ब्रह्मवाक्य निकला व उत्कल कलिगंदेश मे प्रशिद्ध हो गया !

सोमवार, 31 अगस्त 2015

भारत मेँ है ऐसे दो आदर्श मंदिर जहाँ दानपेटी नहीँ रखाजाता...,

युँ तो India_That_Is_भारत मे ऐसे हजारोँ मंदिर मस्जिद गिर्जा गुरुद्वारा है
जिन्हे आम इंसानोँ से ले कर के
सेलिब्रिटि तक सभी दान देते ।
परंतु
आप जानकर हैरान होगेँ भारत मे दो ऐसे मंदिर
भी है जहाँ न तो दानपेटी रखागया है न किसी के द्वारा दान दियेजाने पर मंदिर उसे ग्रहण करता है ।
1.कानपुर उत्तरप्रदेश

भ्रष्टतन्त्र_विनाशक_शनि_मंदिर
मेँ न्यायाधीश ,नेता ,सांसद ,विधायक ,अभिनेता ,विधायक व मंत्रीओँ के प्रवेश वर्जित है ।
मंदिर ट्रष्ट मानता है भ्रष्टाचार के लिये ये लोग ही उत्तरदायी है । यहाँ किसी भी तरह कि दान पर भी सख्त पावन्दी है ।
2. चिलकुर_बालाजी_मंदिर
Hydrabad मेँ भी दानधर्म पर रोक लगाया गया है ।
यह मंदिर हाईद्रावाद मेँ VisaTample के नाम से प्रसिद्ध है च्युँकि यहाँ स्तानीय लोगोँ मेँ ऐसी मान्यता है यदि कोई मंदिर की 108 बार प्रदक्षिणा करेगा उसे Visa मिलजाएगा । इस
मंदिर का खर्च , मंदिर परिसर से पार्किगं से उठाया जाता है जबकी यहाँ रोजाना दर्शन हेतु 70 हजार से 1 लाख भक्त आते है । हफ्ते मेँ यह मंदिर केवल 3 दिन खोला जाता है ....

Extrashot
भारत मेँ चार मुख्य मंदिर तिरुपति ,सिरिडि साईबाबा ,सिद्धिविनायक व काशी विश्वनाथ जी के मंदिरोँ मेँ
संचित धन से बर्तमान
भारतीय इंटरनेट युजर 21000 दिन लगातार अनलिमिटेड इंटरनेट चलासकते है ।

भारत के आदर्श गाँव

धरनई विहार का सर्वप्रथम हाईटेक विलेज है ।
30वर्ष पहले इस गाँव मेँ अंधेरा था ....परंतु सौरउर्जा के इस्तेमाल से इसगाँव मे खुशहाली आयी ।
आज यह गाँव समुचे भारत के लिये प्रेरणा बनकर उभरा है ।

गुजरात राज्य कि पुंसारी
गाँव मेँ हर घर मे WI-FI conection के साथ साथ A.c. आदि लगा हुआ देखा जा सकता है । इतना ही नही पुंसारी गाँव मे स्टिटलाईट व चौड़े पक्के सड़कोँ का भी निर्माण किया गया है ।

मेघालय कि मावलिनगं गाँव को 2003 मे एसिआ कि सबसे स्वच्छ गाँव का दर्जा मिला है । ये गाँव सिलं से 90 K.m. दूरी पर स्थित है ।

केरल कि पोथनिक्कड गाँव को भारत का सबसे शिक्षित गाँव का सम्मान प्राप्त है । 90 के दशक मे यहाँ के कुछ युवाओँ ने स्वेच्छा से लोगोँ को घर घर जाकर पढ़ाना शुरुकिया नतीजन आज यहाँ के लगभग 17563 लोग शाक्षर है ।

कर्णाटक कि कोकरेवेल्लुर गाँव अपने पक्षी प्रेम के लिये जानाजाता है । यह गाँव विलुप्त पक्षीओँ का स्वर्ग है यहाँ पक्षीओँ का असपताल भी खोलागया है ।

हरियाणा कि छापर गाँव के लोग कन्या जन्म होते ही मिठाई बाँटने मेँ लगजाते है । इस गाँव की सरपंच भी महिला है । यहाँ कन्याओँ के जन्म पर उत्सव मनाया जाता है ।

महाराष्ट्र कि हिवारेवजार करोड़पतिओँ का गाँव है ।
यहाँ एक नही दो नही 80 करोड़पति रहते है । इस गाँव कि तरक्की का श्रेय जाता हे पोपट राव नामक व्यापारी को ।
उन्होने गाँव का विकाश किया साथ साथ लोगोँ को भी अपने व्यवसाय मेँ सामिल किया ।

महाराष्ट्र कि एक और गाँव
शनि सिंगनापुर भारत का सबसे सुरक्षित गाँव मे से एक है । इस गाँव कि खासियत यह हे कि यहाँ के घरोँ मेँ दरवाजे नहीँ होते । कहते है चोर इसे शनिक्षेत्र जानकर यहाँ चोरी नहीँ करते ।

ओड़िशा मेँ रघुराजपुर गाँव को साल 2000 मेँ हेरिटेज विलेज का सम्मान मिला था ।
यह गाँव 5वीँ सदी से हस्तकला खासकर पैटिंग के लिये प्रसिद्ध रहा है ।
यहाँ प्रसिद्ध ओड़िशी नृत्यगुरु केलुचरण महापात्राजी का जन्म हुआ था ।


बुधवार, 27 मई 2015

कामाक्षानगर कभी मढ़ी के नाम से जानाजाता था....

कामाक्षानगर ओड़िशा राज्य कि ढ़ेकानाल जिल्ला का एक सहर है ।
इसे अंग्रेजीराज के समय ‪#‎ मढ़ी‬के नामसे जाना जाता था ,19वीँ सदी के मध्यभाग मेँ यहाँ असम राज्य कि अधिष्ठात्री देवी कामाक्षी कि मंदिर निर्माण करते हुए सिँहदेउ राजपरिवारने इस प्रान्त का नाम मढ़ी से कामाक्षानगर करदिया था ।
स्वतंत्रता संग्राम के समय मढ़ी सहर स्वतंत्रता संग्रामीओँ का गढ़ बना था । यहाँ लोगोँने राजा व अंग्रेजीराज के खिलाफ परेशान हो 1940तक हतियार उठालिया था इसे ओड़िशा इतिहास मेँ ‪#‎ प्रजामेली‬के नाम से जानाजाता है !!
कामाक्षानगर के अलावा तालचेर कटक आदि क्षेत्रोँ मेँ प्रजामेली काफी उग्र रुप बना था ।
कामाक्षानगर मेँ हो रहे इस जन आंदोलन दमन करने के लिये अंग्रेजोँ ने ब्राह्मणी नदी पार करते वक्त 12 साल की खंडायत बच्चे ‪#‎ बाजी_राऊत‬को मार दिया बाद मेँ उसके वीरता निडरता कि किस्से गाँव गाँव मेँ मशहुर हुए !!! ओड़िआ लेखक कविओँ के लेख कविता मेँ बाजी राऊत आज भी जिँदा है । ढ़ेकानाल सहर मेँ बाजी राऊत कि याद मेँ एक मिनार का निर्माण किया गया और उस चौक को बाजी चौक नामित किया गया है ।
1980 तक कामाक्षानगर मेँ एक नग्न आदिवासी जाति पायेजाते थे परंतु वक्त के साथ साथ आज वहाँ के प्रायः सभी लोग सभ्य मनचुके है ।
कामाक्षानगर सहर राष्ट्रिय राजपथ नं 200 द्वारा तालचेर व राष्ट्रिय राजपथ 221 द्वारा ढ़ेकानाल से जुड़ा है । ढ़ेकानाल से इसकी दूरी 21 किलोमिटर हे । यहाँ की मुख्य त्यौहारोँ मेँ काली व लक्ष्मी पूजा जिल्ला भर मेँ प्रसिद्ध है ।